कान.
कर्ण ( कान ): कर्ण रोग वर्णन
कठिनाईयाँ
- कानों में अत्यंत शूल चलना |
- मनुष्य की सुनने की शक्ति मारी जाना |
- कान में मैल जमा होने से |
- कान में चोट लगने से |
- कानों में भारी जेवर पहनने से या रगड़ खाने से |
- कानों में सूजन अथवा जलन होना |
कर्ण ( कान ) क्या है ?
कर्ण ( कान ) भी शरीर का आवश्यक अंग है , और इसकी रचना भी जटिल है | एक दूसरे की आवाज पहचानने , बात सुनने समझने और कार्य रूप में परिणत करने तथा चलने फिरने और बैठने में संतुलन बनाए रखने के दोनों कार्य दोनों कानों के ही हैं |
बीमारियाँ
- कान का दर्द
- कान में कीड़ा चला गया हो
- कान का बहना
- कान का बहरापन
- कान में भिनभिनाहट तथा शाँय-शाँय की आवाज आना
- कान में जख्म
- कान के परदे का कमजोर होना
- कानों की नसों का शिथिल होना
- कान के परदे का गलने की वजह से ऑपरेशन की नौबत आना
- कान में छेद होना
कारण
पाचन तंत्र में पुराना मल जमा हो जाने के कारण वायु विकार शिराअों द्वारा कानों में पहुंच कर रोग उत्पन्न करता है |
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